पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय रायवाला पुस्तकालय , देहरादून
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Tuesday, October 27, 2026
DICTIONARY GAME
Sunday, October 11, 2026
NOBEL PRIZE 2026
Navi Pillay
Navanethem "Navi" Pillay
Nobel Peace Prize 2026
Born: 23 September 1941, Durban, South Africa
Prize motivation: “for her efforts to promote peace and international law”
Champion for international legal order
Navanethem “Navi” Pillay has been at the forefront in the development of
an international legal order. Ms Pillay was educated in the law and soon
began defending activists who stood up against apartheid. She grew up
in a family of Indian Tamil descent in Durban, South Africa, where in
1967 she founded her own law firm. In the 1980s she studied at Harvard
University and earned her Doctor of Juridical Science degree there in 1988.
Dr. Pillay was appointed to the High Court of South Africa in 1995. Four
years later she became a judge and President of the International
Criminal Tribunal for Rwanda (ICTR), where she gained distinction for
her role in establishing that sexual violence and rape as well as the spreading
of propaganda could lead to indictment for crimes against humanity and
genocide. She was then named to serve as a judge on the International Criminal
Court (ICC). From 2008 to 2014 she served as the United Nations High
Commissioner for Human Rights (OHCHR). Navi Pillay also chaired
the UN Independent International Commission of Inquiry on the Occupied
Palestinian Territory from 2021 to 2025, and in 2019 she became an ad
hoc judge on the International Court of Justice (ICJ) in the case in which Myanmar
stands accused of genocide. Read More Here : Navanethem Pillay – Facts – 2026
The Nobel Prize in Literature 2026 :Anne Carson
Click here for : Nobel Prize for Literature
The Nobel Prize in Literature for 2026 is awarded to the Canadian author Anne Carson,
“for her bold and inventive oeuvre that, in playful dialogue with the classical tradition, has created new forms
for contemporary literature”.
Anne Carson was born in 1950 in Toronto, Canada. In 1981, she published her doctoral thesis in Classics entitled
Odi et Amo Ergo Sum, and has, throughout her entire career, combined poetry writing with translation work
and teaching at various universities. Almost all her literary production has centred upon the intersection
between the philologist’s obsession with words and the poet’s desire for new meaning. She has herself identified
the etymology of words as the starting point for all her work. Her translations from Classical Greek may
be regarded as independent works in their own right. Among these is her interpretation of Sappho’s
poem fragments, If Not, Winter (2002), along with tragedies such as Sophocles’s Electra (2001) and
Antigone (2015) and Euripides’s Bakkhai (2015).
Monday, September 28, 2026
पुस्तकालय गतिविधि – “मेरी रचनात्मक बुकमार्क”
विद्यार्थियों द्वारा रंग-बिरंगे और आकर्षक हस्तनिर्मित बुकमार्क तैयार किए गए। इन बुकमार्क में सुंदर चित्र, फूल-पत्तियाँ, फल, तितलियाँ और प्रेरणादायक संदेशों का प्रयोग किया गया है।
इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन के प्रति रुचि, रचनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना और कला-कौशल का उपयोग करके प्रत्येक बुकमार्क को एक अनोखा रूप दिया।
बुकमार्क विद्यार्थियों को पढ़ी जा रही पुस्तक में अपना स्थान सुरक्षित रखने के साथ-साथ पुस्तकों की देखभाल और नियमित पठन के लिए प्रेरित करते हैं।
Wednesday, September 23, 2026
National Digital Library & Rashtriya e- pustakalya
National Digital Library of India
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NDLI is a digital learning platform developed by IIT Kharagpur that provides access to a wide range of educational resources such as e-books, journals, study materials and research content.
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📚 राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (Rashtriya e-Pustakalaya)
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राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय भारत सरकार की एक डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को विभिन्न भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पुस्तकों तक आसान पहुँच प्रदान करना है।
उपयोग:
📖 डिजिटल पुस्तकें पढ़ना
🔍 विषय एवं भाषा के अनुसार पुस्तकें खोजना
🌐 कहीं भी और कभी भी पढ़ना
बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना
Monday, August 24, 2026
पीएम श्री गतिविधियों की झलकियाँ
चित्र में पीएम श्री विद्यालय के अंतर्गत आयोजित विभिन्न गतिविधियों की झलक दिखाई गई है। इसमें विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक, शैक्षिक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों को भी महत्व दिया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।
चित्र में पठन संवर्धन सप्ताह और पुरस्कार समारोह प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है। विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। इससे बच्चों में पढ़ने की रुचि और ज्ञान प्राप्त करने की आदत विकसित होती है।
विद्यालय में पुस्तकालय गतिविधियाँ, वाचन और पठन प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। विद्यार्थी किताबें पढ़ते हुए और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल, शब्द-ज्ञान और अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ती है।
चित्र में करियर जागरूकता, सहयोगात्मक शोध और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी गतिविधियाँ भी दिखाई गई हैं। विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई तथा तकनीक का उपयोग करके सीखने के अवसर प्रदान किए गए। इससे उनमें टीमवर्क, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है।
कुल मिलाकर, चित्र पीएम श्री विद्यालय की गतिविधि-आधारित और आनंदमय शिक्षा को दर्शाता है। पढ़ने, तकनीक, शोध, प्रतियोगिताओं और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास का विकास किया जा रहा है। ये गतिविधियाँ बच्चों को भविष्य के लिए बेहतर और सक्षम बनाने में सहायक हैं।
Wednesday, July 22, 2026
केन्द्रीय विद्यालय रायवाला पीएम श्री पुस्तक प्रदर्शनी
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय रावला में विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने और ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों से संबंधित अनेक उपयोगी और आकर्षक पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेज़ी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, सामान्य ज्ञान, पर्यावरण, कला, संस्कृति तथा महान व्यक्तियों की जीवनियों से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध थीं। इसके अतिरिक्त प्रेरणादायक कहानियाँ, बाल साहित्य, चित्र पुस्तकों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकों ने भी विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
विद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष तथा शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पुस्तकों के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित पुस्तक-पठन से ज्ञान बढ़ता है, भाषा का विकास होता है, कल्पनाशक्ति मजबूत होती है तथा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। विद्यार्थियों को प्रतिदिन कुछ समय पुस्तकें पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया गया।
पुस्तक प्रदर्शनी के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन किया और उनके विषयों के बारे में चर्चा की। अनेक विद्यार्थियों ने नई पुस्तकों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा भविष्य में उन्हें पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। इस अवसर ने उनमें पुस्तकालय के प्रति भी नई रुचि उत्पन्न की।
इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण तथा सभी विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्राचार्य महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र होती हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पढ़ने की आदत अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकों को अपना नियमित साथी बनाने का आग्रह किया।
पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन अत्यंत सफल रहा। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में ज्ञानार्जन, स्वाध्याय और पठन-पाठन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास को नई दिशा मिलेगी तथा उनमें आजीवन सीखने की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।
बच्चों को संविधान के मूल्यों के बारे में बताना

भारतीय संविधान भारत का सर्वोच्च कानून है। इसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया। संविधान देश की शासन व्यवस्था, नागरिकों के अधिकारों और सरकार के कर्तव्यों को निर्धारित करता है। इसे बनाने का कार्य संविधान सभा ने किया, जिसके प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे। इसी कारण उन्हें भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार भी कहा जाता है।
भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है। इसमें नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। साथ ही, इसमें मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख है, जो प्रत्येक नागरिक को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं। संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करता है।
भारतीय संविधान का मुख्य उद्देश्य देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की स्थापना करना है। यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है। समय-समय पर देश की आवश्यकताओं के अनुसार संविधान में संशोधन भी किए जाते हैं, जिससे यह बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी बना रहता है। भारतीय संविधान हमारे लोकतंत्र की मजबूत नींव है और प्रत्येक नागरिक के लिए मार्गदर्शक का कार्य करता है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को संविधान की आत्मा माना जाता है। इसमें भारत के मूल आदर्शों और उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावना में सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करने का संकल्प व्यक्त किया गया है। साथ ही, यह राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है।
भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है, जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कार्य करती हैं। संविधान में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से विभिन्न विषयों का विभाजन किया गया है। इससे शासन व्यवस्था संतुलित रहती है और प्रशासन प्रभावी ढंग से संचालित होता है।
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